तुलसी से अधिकतर सभी लोग परिचित हैं | हिन्दू मान्यताओं के अनुसार तुलसी को पवित्र माना गया हैं |इसे माँ लष्मीजी का रूप माना जाता हैं |तुलसी के घर पर होने मात्रा से आंगन खुशनुमा हो जाता हैं | तुलसी से कई आयुर्वेदिक दवाईयां और सौन्दर्य प्रसाधनों का निर्माण किया जाता हैं |
तुलसी मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं -
१. राम तुलसी |
२. श्याम तुलसी |
राम तुलसी हलके रंग की होती हैं और श्याम तुलसी गहरे रंग की होती हैं |तुलसी को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्राकृतिक एंटीबायोटिक माना गया हैं |जिसका नित्य सेवन करने से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती हैं | तुलसी की खुशबू से बारीक़ किट और मच्छर दूर होते हैं |साथ ही कई साडी बीमारियों को जड़ से खतम करने में सहायक हैं -
१.तुलसी के काढ़े से बच्चो के यकृत की खराबी नष्ट हो जाती हैं और पाचन सुचारु रूप से होने लगता हैं | काढ़ा बनाने के लिए १/२ कप तुलसी के पत्ते ले उसे ११/२ कप पानी के साथ उबालकर गरम करे |जब वह १ कप हो जाये तब घुट घुट करके पी ले |
२.तुलसी की मंजरी ,सोंठ ,प्याज का रस और शहद मिलाकर चाटने से सुखी खासी और बच्चो के दमे में लाभ होता हैं |
३.तुलसी के पत्तो का काढ़ा या इसके पत्तो का रस काली मिर्च के साथ लेने से पसीना आकर ज्वर उतर जाता हैं| साथ ही घबराहट दूर करने में भी कारीगर उपाय हैं |
४.काली मिर्च और तुलसी के पत्तो को पीसकर उसकी गोली बनाकर दातो के निचे रखने से डाट का दर्द दूर होता हैं |
५.नीबू के रस के साथ तुलसी के पत्तो को पीसकर दाद पर लगाने से दाद अच्छा होता हैं |
६.तुलसी के पत्तो को पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की कान्ति बढ़ती हैं |
७.तुलसी के पत्तो के रस में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर नाक में २-३ बिन्दे टपकाने से बेहोशी अथवा मूर्छा तुरनत नष्ट होती हैं |
८.किसी भी प्रकार के जखम पर अगर तुलसी के पत्ते का लेप लगाया जाए तो वह जल्दी भरने लगता हैं |
९.किसी भी प्रकार के विष को नष्ट करने के लिए तुलसी का रस पेट भरकर रोगी को पिलाना चाहिए |
१०.तुलसी के रस की कुछ बुँदे कान में टपकाने पर कान का दर्द तुरंत ठीक होता हैं |
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